Official Song Lyrics

Haaye Hussain

Original composition by Abu Sayed
Haaye Hussain official feature image by Abu Sayed
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“इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।”
घोड़े से सिर्फ़ एक जिस्म नहीं गिरा था…
उस दिन इंसानियत, हक़ और इंसाफ़ के सीने पर वार हुआ था।
कर्बला के मैदान में, रेत थी तपती हुई,
प्यासे थे हुसैन, पर रूह थी जगमगाती हुई।
आसमाँ भी रो पड़ा, ज़मीं काँप उठी थी,
ख़ून से तारीख़ ने इक सच्चाई लिखी थी।
सच्चाई लिखी थी…
हाए हुसैन! तुम्हारी क़ुर्बानी रुला देती है,
दिलों को झिंझोड़ के, इक आग जगा देती है।
ख़ून का हर क़तरा ये दर्स सिखाता है,
ज़ुल्म के आगे सर झुकाना, मौत कहलाता है।
हवाओं में आज भी, वो पुकार गूँजती है,
बातिल के सामने बस, इक़रार गूँजती है।
“सर कटा सकते हैं, पर सर झुका नहीं सकते,”
मोमिन की शान यही, हम भुला नहीं सकते।
ज़ुल्म के आगे सर झुकाना नहीं,
हक़ पे जाँ लुटाना ही, मोमिन का फ़ख़्र है।
मोमिन का फ़ख़्र है!
हाए हुसैन! तुम्हारी क़ुर्बानी रुला देती है,
दिलों को झिंझोड़ के, इक आग जगा देती है।
ख़ून का हर क़तरा ये दर्स सिखाता है,
ज़ुल्म के आगे सर झुकाना, मौत कहलाता है।
हाए हुसैन… हाए कर्बला…
ये सिर्फ़ तारीख़ नहीं, हर इंसाफ़-पसंद दिल का दर्द है।
हाए हुसैन…
एक दर्द है…
हाए हुसैन…
हाए हुसैन…
हाए हुसैन…
Song Timeline
Lyric Written June 26, 2026
Music Created June 26, 2026
Official Release June 26, 2026
Song Attribution
Artist Abu Sayed
Composer Abu Sayed
Lyricist Abu Sayed
Publisher Abu Sayed Music
Proof of Authorship
SHA-256 Authorship Fingerprint 1cf8baf3eff228d451c9cc7df38551587ca73bd55f7adb968751631994d77a07
Lyric Version v1
Verified At 2026-06-26T20:02:35.162982